परंपरा और धार्मिकता की स्थिति में आधुनिकता के समावेश का सुझाव महाकाल की सवारी में ‘रोबोटिक हाथी’ की पेशकश पशु-अधिकार संगठन PETA इंडिया ने मंदिर समिति को दान में देने का प्रस्ताव रखा

उज्जैन। बाबा श्री महाकाल की सवारी में असली हाथी की जगह रोबोटिक हाथी के उपयोग का प्रस्ताव है। अभी यह मामला वन विभाग के माध्यम से मंदिर प्रबंध समिति के सामने आया है। हालांकि प्रस्ताव के आने के पूर्व श्रावण-भादौ मास की सवारियों का क्रम शुरू हो चुका था इसके चलते अभी इस पर मंदिर समिति गहनता से विचार नहीं कर सकी है।पशु-अधिकार संगठन PETA इंडिया ने ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर को एक वास्तविक आकार का यांत्रिक हाथी भेंट करने की पेशकश की है, जो धार्मिक जुलूसों में असली हाथी की जगह ले सके। संगठन का कहना है कि इससे न केवल किसी पशु को कष्ट नहीं होगा, बल्कि यह सालभर श्रद्धालुओं को भी आकर्षित कर सकता है।केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई मंदिरों में इस तरह के हाथी अब स्वीकार किए जा चुके हैं। देशभर के 40 से अधिक मंदिरों में रोबोटिक हाथी पहले ही स्वीकार किए जा चुके हैं। PETA अब तक ऐसे 29 हाथी दान कर चुका है। हाल के उदाहरणों में महाराष्ट्र के पंढरपुर स्थित इस्कॉन मंदिर, नवी मुंबई और कानपुर शामिल हैं। यहाँ तक कि तेलंगाना सरकार ने भी अपने आधिकारिक समारोहों के लिए एक रोबोटिक हाथी अपनाया है।प्रति वर्ष सवारी में जरूरत-श्रावण-भादो की सवारियों के लिए हर साल हाथी की जरूरत होती है। दुसरी सवारी से हाथी शामिल होता है। उस पर भगवान के मनमहेश स्वरूप को विराजित किया जाता है। महावत के साथ भगवान के स्वरूप और एक पंडित प्रतिनिधि भी इस पर सवारी के दौरान चलते हैं।’असली जैसा हिलाएगा कान-पूंछ, छोड़ेगा धुआं’  संगठन की और से पिछले बुधवार को उज्जैन वन विभाग के अफसर को रोबोटिक हाथी का प्रस्ताव देते हुए संगठन प्रतिनिधि ने प्रेजेंटेशन दिखाया। संगठन का दावा है कि ये मशीन हूबहू असली हाथी जैसी होगी। सवारी के दौरान ये कान फड़फड़ाएगी, सूंड हिलाएगी, पूंछ पटकेगी और पानी की बौझार भी कर सकेगी। वन मंडलाधिकारी अनुराग तिवारी ने बताया, “PETA ने कहा कि दक्षिण भारत के कई मंदिरों में अब रोबोटिक हाथी का इस्तेमाल हो रहा है। इससे भीड़ में होने वाले हादसों से बचा जा सकता है। उन्होंने प्रस्ताव के साथ मंदिर समिति से बात करने की इच्छा भी जताई।”लेकिन सवारी का क्रम शुरू हो चुका है, इसलिए इस पर तुरंत कोई फैसला नहीं हो पाया।मंदिर समिति हाथी को देती है मेहनताना-मंदिर समिति हर सवारी के बाद हाथी को मेहनताना देती है – 5 किलो घी, 1 डिब्बा तेल, 5 किलो गुड़, 10 साबुन और 5100 रुपये नकद।हाथी दान का भी मिला था प्रस्ताव-मंदिर समिति से जूडे सूत्रों के अनुसार करीब दो दशक पूर्व भोपाल के एक श्रद्धालू ने मंदिर को हाथी दान की मंशा जताई थी। उस दौरान हाथी की खरीदी से लेकर यहां लाने तक का खर्च श्रद्धालु ने उठाने के लिए कहा था। बाद में इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका और यह मामला आया गया हो गया।पेटा एक नजर में-पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) एक प्रमुख पशु अधिकार संगठन है जिसकी स्थापना 1980 में एलेक्स पाचेको और इंग्रिड न्यूकिर्क ने की थी। शुरुआत में अनुसंधान प्रयोगशालाओं में होने वाली क्रूरता को उजागर करने के लिए पहचाना जाने वाला PETA एक वैश्विक संस्था के रूप में विकसित हुआ है जिसके नौ मिलियन से अधिक सदस्य और काफी वार्षिक व्यय हैं। यह संगठन पशुओं के शोषण के विभिन्न रूपों के खिलाफ अभियान चलाता है, जिनमें विविसेक्शन, फैक्ट्री फार्मिंग, शिकार और मनोरंजन तथा उत्पाद परीक्षण में पशुओं का उपयोग शामिल है। PETA का मानना है कि पशुओं का उपयोग मानव लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए और यह तकनीकी प्रगति द्वारा संभव बनाए गए विकल्पों को बढ़ावा देता है।

 

 

 

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